
नई दिल्ली। संसद मार्च में बच्चों पर चली लाठियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। सीजेआई के सुनवाई से मना करने पर अभिजीत दीपके आश्चर्य व्यक्त किया है। दिल्ली में सोमवार (20 जुलाई) को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए थे। सोशल मीडिया पर पुलिस बर्बरता का दावा करते हुए कई वीडियो शेयर किए गए, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था। कोर्ट के इस दो टूक से दीपके हैरत में पड़ गए हैं।
इन वीडियो को देखने के बाद से प्रदर्शनकारियों और आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों में आक्रोश था। यह मामला जब दिल्ली हाई कोर्ट के पास ले जाया गया तो अदालत ने यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि कोर्ट को इसमें न घसीटा जाए। इसके बाद तत्काल सुनवाई के लिए जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई तो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने भी सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि कोर्ट को मार्च के वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई से इन्कार करने पर अभिजीत दीपके को बहुत ताज्जुब हो रहा है। मानों उनके पास जवाब देने के लिए कोई शब्द ही नहीं थे। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह खबर पोस्ट कर के कई प्रश्नवाचक चिन्ह बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से 22 जुलाई बुधवार को इनकार कर दिया था। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने मामले का उल्लेख किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, “पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी मेरे पास हैं, अगर इस मामले को कल सूचीबद्ध किया जा सके।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन अनुरोध किए गए हैं। प्रधान न्यायाधीश ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि पीठ इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है। हम वीडियो नहीं देखना चाहते।”





