बस्ती (उ.प्र.)। महान भारतीय चिंतक, दार्शनिक एवं ‘एकात्म मानववाद’ के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत वन्दे मातरम् के 150वें वर्ष के समापन अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में पूर्वाह्न 11 बजे राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। विद्यालय की वंदना टोली ने माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का परिचय एवं स्वागत प्रधानाचार्य गोविन्द सिंह ने कराया तथा संचालन परीक्षा प्रमुख आशीष सिंह ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला समन्वयक, समग्र शिक्षा माध्यमिक शिक्षा श्री वागीश पाठक रहे। अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बस्ती के जिला प्रचारक सर्वेन्द्र जी ने की। विद्यालय प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष प्रहलाद मोदी विशिष्ट अतिथि रहे। प्रतिष्ठित विद्यालय के प्रबंधक मनोज सिंह की भी मंच पर गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि प्रहलाद मोदी ने कहा कि वन्दे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। इसका गायन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम् के गायन से राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत होती है। इस अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग के प्रधानाचार्य गोविन्द सिंह ने छात्रों को संबोधित किया।

मुख्य अतिथि वागीश पाठक ने वन्दे मातरम् को देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और समर्पण का प्रतीक बताते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं समर्पण का स्मरण करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् ने राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर विद्यालय के संगीताचार्य मयंक सिंह एवं संगीत टोली ने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

अपने अध्यक्षीय आशीर्वचन में जिला प्रचारक सर्वेन्द्र जी ने वन्दे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाधीनता संग्राम के दौरान इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में राष्ट्रभक्ति एवं ऊर्जा का संचार किया। विद्यालय के प्रथम सहायक एवं उप प्रधानाचार्य विजय नारायण उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


