
बस्ती (उ.प्र.)। बस्ती के अर्चना हास्पिटल ने चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए जटिल सर्जरी में 45 मिमी गॉल ब्लैडर स्टोन का सफल निष्कासन करके मरीज को बड़ी मुसीबत से मुक्ति दिलाई है। इस अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी में विशेषज्ञ सर्जन डॉ. अमित नायक और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सत्यम पांडेय की टीम ने एक मरीज के पित्ताशय से 45 मिमी. आकार का विशालकाय पथरी सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

अर्चना हास्पिटल के निदेशक अमरमणि पाण्डेय ने बताया कि मरीज लंबे समय से असहनीय पेट दर्द, उल्टी और गंभीर परेशानी से जूझ रहा था। जांच में पता चला कि पित्ताशय के भीतर यह बड़ा पथरी लगभग पूरी जगह घेरे हुए था, जिससे सूजन और गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ गया था। ऐसी स्थिति में सर्जरी ही एकमात्र सुरक्षित और प्रभावी विकल्प था। इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व डॉ. अमित नायक ने किया। सूजे हुए और अत्यंत नाजुक ऊतकों के बीच इतने बड़े पथरी को बिना पित्त नली या आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचाए निकालना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने अपनी उत्कृष्ट सर्जिकल दक्षता, सटीकता और अनुभव का परिचय देते हुए इस कठिन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया प्रबंधन की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। डॉ. सत्यम पांडेय ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को पूरी तरह स्थिर बनाए रखा। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, उन्होंने रक्तचाप, हृदय गति जैसे महत्वपूर्ण मानकों का बेहतरीन नियंत्रण सुनिश्चित किया, जिससे सर्जन को सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में कार्य करने में सहायता मिली। सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है और अब वह लंबे समय से झेल रहे असहनीय दर्द से पूरी तरह राहत पा चुका है। यह सफलता डॉ. अमित नायक और डॉ. सत्यम पांडेय के उत्कृष्ट तालमेल, उच्च स्तरीय चिकित्सा कौशल और त्वरित निर्णय क्षमता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
बिना किसी नोटिस के भू माफिया बताकर बीडीए ने ध्वस्त करा दिया चिन्हीकरण, पीड़ित सुरेन्द्र ने कहा – न्याय न मिला तो जायेंगे अदालत

बस्ती। कोतवाली थाना क्षेत्र के जयपुरवा निवासी सुरेन्द्र कुमार चौधरी ने बस्ती विकास प्राधिकरण आरोप लगाया है। पत्रकारों से बातचीत में सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि उन्होंने गाटा सं० 77, 78 जो कि घरसोेहिया में स्थित है का बैनामा लिया था जिसका सीमांकन बाउण्ड्री व चिन्हीकरण किया गया था। इस गाटे पर किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। 23 अप्रैल 2026 को विकास प्राधिकरण द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के बुल्डोजर से चिन्हांकन को गिरा दिया गया। इस कार्यवाही को विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियन्ता हरिओम द्वारा कराया गया। पूछने पर उन्होंने नोटिस जारी करने की बात कही। जब नोटिस के बारे में पूछा गया तो गाटा संख्या 157/2, 157/3 की नोटिस दिखायी गयी है जिससे सुरेन्द्र चौधरी का कोई लेना देना नहीं है। सुरेन्द्र कुमार चौधरी ने पहले ही गाटा संख्या 77, 78 के ले आउट के सम्बन्ध में आवेदन किया है।

उन्होने बताया कि अवैध मांग न पूरी करने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही बिना किसी नोटिस के किया गया है। उन्होने बताया कि उनकी वैध जमीन पर विकास प्राधिकरण द्वारा मनमानी कार्यवाही की गई। इस मामले से उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उन्हें भू-माफिया बताया जा रहा है। कहा कि वे इस पूरे प्रकरण को जिलाधिकारी के समक्ष ले जायेगे और यदि बीडीए के दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों के विरूद्ध समुचित कार्यवाही न हुई तो वे हाई कोर्ट जायेंगे और सम्बंधित पर मानहानि का दावा भी करेंगे।





