जमीन के विवाद में वृद्ध की हत्या और तीन को घायल करने के मामले में 9 अभियुक्त दोषी करार, मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास
संतकबीरनगर।
स्थानीय जनपद के खलीलाबाद थाना क्षेत्र के तेनुआराय गांव में जमीन के विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष और सनसनीखेज हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम गजेन्द्र ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने विचारण के उपरांत मुख्य अभियुक्त छोटेलाल समेत कुल 9 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। वादी मुकदमा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमित कुमार उपाध्याय के तर्कों और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मुख्य हमलावर को आजीवन कारावास और अन्य दोषियों को भी कठोर सजा से दंडित किया है।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा रमेश चन्द्र राय और उनके परिवार का जमीन को लेकर गांव के ही छोटेलाल, फूलचन्द्र, रामप्रकाश आदि से पुराना विवाद चल रहा था। वादी की उसी बैनामाशुदा जमीन पर एक छोटी गुमटी रखकर जीवनयापन किया जा रहा था। घटना 25 मार्च 2017 की शाम करीब 8:00 बजे की है, जब विपक्षीगण लाठी, डंडा, फावड़ा और ईंट-पत्थर से लैस होकर गोलबंद होकर पहुंचे और जबरन कब्जा करने के नीयत से हमला बोल दिया।
बीच-ब बचाव करने आए वादी के 62 वर्षीय पिता संतराज पर मुख्य अभियुक्त छोटेलाल ने लाठी से सिर पर जानलेवा प्रहार कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा बीच-बचाव में आए वादी रमेश चन्द्र, उनके भाई दिनेश चन्द्र और माता फेंकना देवी को भी लाठी-डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था।
अतिरिक्त साक्ष्यों और गवाहों पर टिकी न्याय की जीत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह परीक्षित कराए गए। वादी रमेश चन्द्र (पीडब्लू-1), चक्षुदर्शी व घायल गवाह दिनेश चन्द्र (पीडब्लू-2) और घायल माता फेंकना देवी (पीडब्लू-3) ने घटना का आंखों देखा हाल बयान किया। इसके अलावा डॉ. वीरेन्द्र कुमार चौधरी (पोस्टमार्टमकर्ता) और डॉ. शिवानन्द सिंह (चोटहिलों का मेडिकल परीक्षण करने वाले चिकित्सक) की रिपोर्ट और साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के बयानों को पूरी तरह पुष्ट किया। बचाव पक्ष द्वारा इसे महज दुर्घटना बताने और अन्य दलीलों को अदालत ने साक्ष्यों के आगे खारिज कर दिया।
न्यायालय का निर्णय एवं सजा:
मामले के सभी पक्षों को सुनने और पत्रावली का बारीकी से परिशीलन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम श्री गजेन्द्र ने निम्नलिखित सजा सुनाई:
मुख्य अभियुक्त छोटेलाल:
धारा 302 भा०दं०सं०: आजीवन कारावास एवं 10,000/- रुपये अर्थदंड (अदा न करने पर 2 माह का अतिरिक्त कारावास)।
धारा 147, 148, 323/149, 325/149 भा०दं०सं०: विभिन्न धाराओं के तहत 1 वर्ष से लेकर 3 वर्ष 6 माह तक का कठोर कारावास एवं कुल 9,000/- रुपये का जुर्माना।
अन्य 8 अभियुक्तगण (राम प्रकाश, शकुन्तला देवी, सुदामा देवी, अर्जुन, भीम, संजय, जितना देवी व विन्देश्वरी):
* न्यायालय ने इन सभी को धारा 147, 148, 323/149, 325/149 भा०दं०सं० के अंतर्गत दोषसिद्ध करते हुए विभिन्न अवधियों (1 वर्ष से 3 वर्ष 6 माह तक का कठोर कारावास) और अर्थदंड से दंडित किया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन अभियुक्तों पर सीधे हत्या का आरोप नहीं सिद्ध हुआ, किंतु बलवा और मारपीट में इनकी संलिप्तता पूरी तरह साबित पाई गई। महिला अभियुक्तों और अन्य को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देने की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि उन्होंने एक महिला (फेंकना देवी) और अन्य परिजनों पर गंभीर हमला किया था।
अदालत ने आदेश दिया है कि वसूले जाने वाले कुल जुर्माने की 50% धनराशि मृतक की पत्नी श्रीमती फेंकना देवी को प्रतिकर के रूप में प्रदान की जाएगी।
वादी मुकदमा के अधिवक्ता अमित कुमार उपाध्याय की सशक्त तर्कों और पुलिस की प्रभावी विवेचना के चलते पीड़ित परिवार को लगभग 9 साल बाद न्याय मिला है, जिससे न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और सुदृढ़ हुआ है।


