बस्ती ने एक संघर्षशील आवाज खो दी—कामरेड के. के. तिवारी नहीं रहे
बस्ती (उ.प्र.)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ट्रेड यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष कामरेड केके तिवारी का आज आकस्मिक निधन हो गया। वे किसान, मजदूर और आम आदमी के सवालों को अपनी आवाज देने वाले थे। उन्होंने राजनीति को केवल पद और पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि संघर्ष और जनसरोकार का रास्ता माना। कठिन परिस्थितियों में भी आम लोगों के सवालों को उठाना उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान रहा। उनका पूरा नाम कुमार कार्तिकेय त्रिपाठी था। वे सिद्धार्थ नगर के चोरथरी गांव के मूल निवासी थे। वे बस्ती में पुराना डाकखाना स्थित अपनी पुश्तैनी कोठी में रहते थे। वे 2-3 वर्षों तक बस्ती जिला मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार भी रहे।
कामरेड केके तिवारी संगठन के सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता थे। बस्ती और आसपास के जिलों में कामरेड के रुप में उनकी अच्छी धाक थी। वैसे तो उन्होंने कई चुनाव लड़े। उन्होंने 2022 में बस्ती सदर से विधानसभा प्रत्याशी रहे।
आज उनके जाने से बस्ती ने एक ऐसी आवाज खो दी है, जो सत्ता के सामने सवाल रखने और कमजोर के पक्ष में खड़े होने का साहस रखती थी।
कामरेड के. के. तिवारी को विनम्र श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल परिवार, साथियों एवं शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।
।।लाल सलाम कामरेड।।
बहुत याद आओगे ,,,,,,
मैं पिछले 27 साल से गरीब, खेत- मजदूर या दिहाड़ी मजदूर , आंगनबाड़ी या रसोइया, ऑटो चालक या रिस्का चालक के आवाज बनते देखा आपको,,,,,,
उपनिवेसिक, सामंतवाद और पूंजीवादी शक्ति तथा दक्षिण पंथी विचार के घोर आलोचक कामरेड के. के. त्रिपाठी के असमय मृत्यु बस्ती के साम्यवादी आंदोलन के चिराग़ के लौ क्षीण होता दिख रहे,,,,,!!!!!
पूरे जनपद बस्ती में सिर्फ एक व्यक्ति , जो सिद्धांतवादी राजनीति के समर्थक थे, इस नश्वर संसार को त्यागकर गोलोकवासी हो गए। मजदूरों, दैनिक कर्मचारियों, शासन-प्रशासन से पीड़ित कामगारों की आवाज़ सदैव प्रमुखता से उठाने वाले तथा शासन-सत्ता से सदैव जूझने वाले बड़े भाई आदरणीय K. K. Tripathi जी आज इस संसार को छोड़कर महादेव के श्रीचरणों में स्थान पा लिए। महादेव दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें एवं परिवार को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं साहस प्रदान करें 🙏। आज बस्ती जनपद ने जो खोया है, उसकी भरपाई किसी भी स्तर से नहीं की जा सकती। बड़े भाई त्रिपाठी जी की मृत्यु एक अपूरणीय क्षति है 🙏। हृदय व्यथित है, दुःखी है, द्रवित है 🙏 मरकर भी आपके विचार लोगों के मन-मस्तिष्क में जिंदा रहेगा 🙏
प्रखर राष्ट्रवाद के पक्षधर समाजसेवी भृगुनाथ त्रिपाठी ‘पंकज’ ने का. केके तिवारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनसे मेरे कड़े वैचारिक मतभेद थे, हम बहुत जोरों से लड़ पड़ते थे। यहां तक की मैंने फेसबुक में अपनी मित्रता सूची से उन्हें हटा दिया था फिर भी जब भी मिलते तो रोकते और छोटे भाई जैसा प्यार देते और खूब सारी चर्चा होती। उनके पास इतिहास का बड़ा ज्ञान था। हम सब वर्षों तक लगभग हर दिन विकास शुक्ल जी की दुकान पर मिलते थे। जब मैं एक बार एक मुकदमे में फंसा था तब वो वैचारिक विरोध को भुलाकर जिलाधिकारी और एस पी से मिले और मेरा पक्ष रखा। मिलते ही हल्की सी मुस्कुराहट के साथ हाथ मिला लेना और चाय के लिए कहना ये यादें कभी भूलेंगी नही। विनम्र श्रद्धांजलि


