बस्ती (उ. प्र.)। बस्ती के लिए 25 मई 2026 का दिन बस्ती की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की बदौलत ऐतिहासिक हो गया। मौका था एक साथ दो हजार एक सौ (2100) महिलाओं द्वारा एक साथ संगीतबद्ध सोहर गाने का। इस शानदार कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय पहल वेलफेयर एण्ड एजूकेशनल सोसायटी द्वारा अटल बिहारी वाजपेई प्रेक्षागृह के परिसर में किया गया। इसी के साथ बस्ती का नाम विश्व स्तर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। यह दावा सामाजिक संस्था पहल के अध्यक्ष मनीष मिश्र ने किया है। उन्हीं के सतत् प्रयासों से बस्ती को यह वैश्विक पहचान मिल पा रही है। कार्यक्रम की बेहतरीन तैयारियों का आलम यह रहा कि 2100 का लक्ष्य निर्धारित कर आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में 2500 महिलाओं ने भाग लिया। जो अपने आप में एक मिसाल है।
इस कार्यक्रम को रामजी का सोहर नाम दिया गया था, और महिलाओं ने बहुत उत्साह के साथ पहल की देखरेख में महीने भर से इसकी तैयारियां की थीं। कार्यक्रम के समय सोहर गायन की छटा देखते ही बनती थी। लग रहा था मानों किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो।
पहल के अध्यक्ष मनीष मिश्र ने कहा कि जिस भारत में कभी नक्सलवाद, भय और हिंसा की खबरें आती थीं, आज वहीं “रामजी का सोहर” गूंज रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प ने नए भारत को बंदूक से संस्कृति, भय से विश्वास और आतंक से आस्था की ओर आगे बढ़ाया है।
बस्ती ने इतिहास रच दिया है। बस्ती की हमारी 2500 माताओं-बहनों ने एक साथ सोहर गाकर, विश्व पटल पर आज बस्ती का नाम पहुँचा दिया है। लेकिन यह स्वाभाविक है कि स्वार्थ की राजनीति से प्रेरित कुछ लोगों को बस्ती की यह उपलब्धि नहीं सुहाएगी। कुछ लोग हैं, जो तरह-तरह के आक्षेप लगा रहे हैं। मैं उन्हें जवाब नहीं देना चाहता था, लेकिन मेरी बहनों ने मुझे फोन कर-करके बोला, कि भईया ये लोग आपका और गिनीज की team का अपमान नहीं कर रहे, ये लोग हमारा अपमान कर रहे हैं, हमने इतनी मेहनत से record बनाया है, इसलिए इनलोगों को सबूत के साथ एक बार जवाब दे दीजिये।
पहली बात तो यह, कि गिनीज बुक में बस्ती का नाम ले जाने का हमारा प्रयास कोई एक दिन का नहीं था। हमारी बहनें पिछले 5 महीने से सोहर की practice कर रही थीं। तो यह एक दिन की उपलब्धि नहीं है। लगातार पिछले 5 महीने से दिन-रात एक करके हमने यह किया है।
दूसरी बात, कि गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की team से भी हमारी team पिछले 2 महीने से बात कर रही थे, जिसका सबूत मैं इस पोस्ट के साथ लगा दे रहा हूँ।
तीसरा, कि अंधे को सब हरा-हरा नज़र आता है, जो लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि certificate पर गलत date लिखी हुई है, उनको मैं साफ़-साफ़ बता दूँ, कि अभी record attempt हुआ है, उसका सबूत गिनीज के प्रतिनिधि ने बस्ती में मंच पर आकर हमें दिया। अब हम गिनीज की वेबसाइट पर इसका सबूत डालेंगे, और उधर से एक certificate बनकर अगले 10-15 दिनों में हमारे पास आएगा। जिनको भी doubt है, उनके लिए मैं काम आसान कर देता हूँ। Reference-
SF-114861-05052026111542msia इस reference number को गिनीज की वेबसाइट पर डाल के आप हमारा record चेक कर सकते हैं। और गिनीज, मनीष मिश्रा की एजेंसी नहीं है। लंदन में इनका ऑफिस है। हमने गिनीज की team को official payment भी किया है, जितनी उनकी fee है। उसका सबूत भी मैं नीचे दे रहा हूँ। इसलिए भ्रम फैलाने से अच्छा है, कि उनकी वेबसाइट पर जाकर रेफरेंस नंबर सर्च करके बस्ती का रिकॉर्ड अटेम्प्ट ये लोग देख लें। कुपढ़ो के लिए मैं गिनीज की वेबसाइट का link भी नीचे दे दे रहा हूँ।
गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में बस्ती का नाम दर्ज कराने के लिए उनको fee भी pay करना होता है। उस fee का सबूत भी मैं नीचे दे रहा हूँ, और वह fee मैंने अपने खून-पसीने बहाकर अर्जित किये गए पैसे से भरी है। क्योंकि मेरी मातृभूमि, मेरी बस्ती का मुझपे कर्ज है। उनका तो अभी शतांश भी नहीं उतरा। अभी तो मैंने बस्ती के लिए काम करना शुरू ही किया है। अभी तो बस्ती के विकास से जलने वाले लोग और जलेंगे। जिन लोगों को Guinness की spelling भी नहीं पता है, उनके अफवाह फैलाने से कुछ नहीं बिगड़ेगा।
प्यारे बस्तीवासियों, जो लोग कुछ नहीं कर सकते वो कुतर्क करते हैं, लेकिन जो लोग सृजन की राजनीति करते हैं, वो चरैवेति-चरैवेति के सिद्धांत पर चलते हैं। जो बिल्लियाँ खिसिया कर खम्बा नोच रही हैं, इनको करने दीजिये। ये लोग यही कर सकते हैं। बस्ती की मेरी माताएं, मेरी बहनें इन rejected मालों और उनके कुतर्की समर्थकों को जवाब देने के लिए पर्याप्त हैं।
चाय में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिए गए लोग, बस्ती का क्या अपमान करेंगे। इनके षड्यंन्त्रों के बावजूद मैं बस्ती को बेस से लेकर स्पेस तक जाऊँगा।
http://www.guinnessworldrecords.com
Reference-
SF-114861-05052026111542msia




