
लखनऊ। अपने कार्यों से सुर्खियों में रहने वाले उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया है। ये 2022 बैच के आईएएस हैं। अपने त्यागपत्र में राही ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं दिया गया और संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है। वे वर्तमान में राजस्व परिषद से संबद्ध चल रहे हैं। ये वही जांबाज आईएएस है अफसर हैं, जिन्हें करीब 80 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में कार्यवाही करने के गोली मारी गई थी, और उन्होंने एक आंख भी गंवा दी थी।

राही ने राष्ट्रपति को भेजे इस्तीफे में कहा है कि एसडीएम रहते हुए की गई कार्रवाई के बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया है। एक ईमानदार अधिकारी के लिए गरिमापूर्ण और सार्थक कार्य न मिलना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनता की सेवा का अवसर नहीं दिया जा रहा था, जो उनके लिए अस्वीकार्य था। ऐसे में उन्होंने इसे नैतिक और सैद्धांतिक निर्णय बताते हुए सेवा छोड़ने का कदम उठाया। इससे वे काफी आहत थे।

पिछले वर्ष जुलाई में शाहजहांपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की तैनाती के दौरान वकीलों के प्रदर्शन से जुड़ा उनका एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर खूब प्रसारित हुआ था। इसमें वे कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते हुए दिख रहे थे। इसके बाद ही सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया था। रिंकू का नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है।
IAS से पहले समाज कल्याण अधिकारी थे रिंकू सिंह राही
रिंकू सिंह राही पहले भी कई बार सुर्खियों में रहे हैं। IAS बनने से पहले उन्होंने UP PCS परीक्षा पास की थी और समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रहे। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान छात्रवृत्ति के करीब 80 करोड़ के बड़े घोटाले को उजागर किया था, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था। हमले में उन्हें सात गोलियां लगी थीं। उनकी इस कार्यवाही से नाराज माफिया ने उन पर जानलेवा हमला किया, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं और एक आंख की रोशनी चली गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संघर्ष करते हुए वर्ष 2022 में आइएएस बनकर एक मिसाल कायम की।





