
राना दिनेश प्रताप सिंह, नीलम सिंह ने गुरूकुल निर्माण के लिये भेंट किया एक लाख इक्यावन हजार
बस्ती (उ.प्र.)। महर्षि वशिष्ठ आश्रम बढ़नी मिश्र में शुक्रवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने गुरू वशिष्ठ रामायण कथा के तीसरे दिन अपने पैतृक गांव बढ़नी मिश्र में गुरू वशिष्ठ, माता अरूंधति, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और अन्य देवी देवताओं के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा की। जगदगुरु रामभद्राचार्य जी ने पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र व बस्ती की डीएम कृत्तिका ज्योत्सना से कहा की वशिष्ठ धाम को अयोध्या धाम से जोड़ा जाए। वशिष्ठ धाम को पर्यटन से जोड़ा जाए। कहा कि बढ़नी मिश्रा के लोग हमारा परिवार हैं। वशिष्ठ आश्रम पर हमारे लिए कुटी बनाई जाए ताकि जब मेरा मन करे मैं अपने परिवार के बीच इस कुटी में आकर रह सकूं। उन्होंने कहा की चित्रकूट की तरह गुरुकुलम की एक शाखा वशिष्ठ धाम में भी खुले वह वशिष्ठ जी की तरह चारों भाइयों को बैठाकर उनसे संवाद कर रहे थे।

आचार्य प्रभाकर मिश्र, नीरज परासर, मोहितदास, जितेन्द्र तिवारी, संजय तिवारी, हर्ष मिश्र, हरदेव वशिष्ठ, वेणु गोपाल, श्रीधर अधिकारी और राकेश अग्निहोत्री ने जगदगुरु रामभद्राचार्य जी के मार्ग दर्शन में वशिष्ठ धाम मंदिर में विधि विधान से मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सम्पन्न कराया।
तीसरे दिन गुरू वशिष्ठ रामायण कथा को विस्तार देते हुये जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि श्री राम अपने भाइयों के साथ बचपन में ऋषि वशिष्ठ आश्रम गए थे ताकि शिक्षा प्राप्त कर सकें। राजपरिवार के कर्तव्यों को सीख सकें और अवध के आदर्श भावी राजा बनने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। बाद के जीवन में भी रामजी अपने जीवन में आने वाली किसी भी शंका, उलझन या समस्या के समाधान के लिए वशिष्ठ के निरंतर संपर्क में रहते थे। श्री राम के परिवार के राजपुजारी होने के नाते वशिष्ठ का भावी राजा की सहायता करना नैतिक कर्तव्य था। वे भारत के सात महान ऋषियों में से एक थे। उन्होने श्री गुरु वशिष्ठ महिमा के अनेक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को अनेक पौराणिक जानकारी दिया।

कथा के तीसरे दिन हिमांचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल भी पहुंचे। आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह, नगर पंचायत नगर की अध्यक्ष नीलम सिंह राना ने गुरूकुल निर्माण के लिये 1 लाख 51 हजार रूपये की राशि गुरू चरणों में समर्पित किया। मुख्य यजमान चन्द्रभूषण मिश्र, सतीश मिश्र, शिवपूजन श्रीवास्तव, शशिकान्त मिश्र, आशुतोष मिश्र, शरद श्रीवास्तव ने विधि विधान से चरण पादुका का पूजन किया।
श्री गुरु वशिष्ठ राम कथा की सांस्कृतिक संध्या में धनुषधारी चतुर्वेदी के भजनों ने कथा पंडाल के सभी श्रोताओं को मंत्र मुक्त कर दिया, साथी कलाकार सत्यम सिंह के भावपूर्ण भजनों ने सबको भाव रुपी रस का श्रवण पान कराया।

सरस्वती बालिका विद्या मंदिर रामबाग बस्ती के बाल कलाकारों ने प्रभु राम की जीवन यात्रा पर सुंदर सी नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। राम आए हैं वशिष्ठ नगरी, बाल कलाकार अंशिका मौर्य, वैष्णवी मिश्रा, आरोही पाठक, आराध्या त्रिपाठी, श्रद्धा चौधरी, वैष्णवी मिश्रा, दीपिका चौबे, एकता शुक्ला, रक्षिता पांडे, आभ्या शुक्ला, सृष्टि तिवारी, दिव्यांशी पाण्डेय, प्रज्ञा पाण्डेय, आराध्या मिश्रा, अवंतिका पाठक, अदिति द्विवेदी, निधि चौधरी, प्रीति यादव, सौम्या त्रिपाठी, रचित पांडे, श्रेया शुक्ला, शीतल, आदि ने प्रस्तुति दी।

कथा के तीसरे दिन अयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष नगर श्रीमती नीलम सिंह ‘राना’, भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, रघुनाथ दास शास्त्री, वृजेन्द मिश्र, उमाशंकर मिश्र, आशीष मिश्र, सुधांशु मिश्र, केसरीनन्दन मिश्र, नीतिका त्रिपाठी, वृजेश कुमार, संतोष मिश्रा, आलोक मिश्रा, विकास मिश्रा, संजय मिश्रा, विशाल यादव, नीतीश पाण्डेय, अवधेश मिश्र, मास्टर शिव के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।
ब्राम्हण कभी जातिवादी नहीं रहा, सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना होगा
जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे वह गुरू वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते
द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा दिया होता तो महाभारत न होता – वशिष्ठ रामायण कथा का दूसरा दिन
महर्षि वशिष्ठ आश्रम बढ़नी मिश्र में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के श्री मुख से वशिष्ठ रामायण कथा के दूसरे दिन रामभद्राचार्य जी ने कहा कि वे अपने परिवार मंें 1415 वीं कथा कह रहे हैं। ‘गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब आइ; साक्षात ईश्वर अपने चारों भाइयों के साथ गुरू वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा लेने आये। जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे वह गुरू वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते। कथा के क्रम में रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना ही होगा। समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं हैं।

रामभद्राचार्य ने कहा कि ब्राम्हण कभी जातिवादी नहीं रहा। दुर्भाग्य से अनेक ब्राम्हण मांस सेवन, मछली खाने के साथ ही शराब का सेवन करने लगे हैं। ऐसे में ब्राम्हणों को स्वयं जागरूक होना होगा। महात्मा जी ने कहा कि गुरू वशिष्ठ, माता अरून्धती ने विश्व कल्याण के लिये अनेक पद्धतियों को जन्म दिया। रामभद्राचार्य ने बताया कि 20 फरवरी शुक्रवार को दिन में 12 बजे से गुरू वशिष्ठ, माता अरून्धती, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न और विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। रामभद्राचार्य ने कहा कि वे स्वयं जातिवादी नहीं हैं। रामभद्राचार्य जी ने कहा कि बस्ती को वशिष्ठ नगर होना ही है। बढनी मिश्र गांव की अपनी आध्यात्मिक विशेषता है। रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरू वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर दिया।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना न किया होता तो महाभारत न होता। गुरू वशिष्ठ ने राजकुमारों के साथ सभी वर्गो को शिक्षा दिया।
कथा के यजमान दिनेश मिश्रा, मीरा मिश्रा, राम चरन मिश्र, राधे रमण मिश्रा, पवन उपाध्याय, वंदना को आचार्य रामचन्द्रदास जी महाराज ने चरण पादुका पूजन कराया। आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह और कमेटी के सदस्यों ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राना दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पूज्य गुरूदेव ने बस्ती को वशिष्ठ नगर बनाये जाने का उद्घोष कर दिया है। वे लम्बे समय से इसके लिये संघर्ष कर रहे हैं। निश्चित रूप से यह लक्ष्य गुरू कृपा से पूर्ण होगा। कथा आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने भरे मंच से बस्ती को वशिष्ठ नगर किए जाने की मांग की रामभद्राचार्य जी से की किया जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया।

इसी कड़ी में वशिष्ठ रामायण कथा की सांस्कृतिक संध्या में वशिष्ठ धाम से पधारे मथुरा वृंदावन से नम्रता सिंह सुर संग्राम से उर्मिला राज, अभिषेक राणा ने ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’ ‘मंगल भवन अमंगल हारी , तोहार लंका जारी हमार पूछ से , जो प्रेम गली में आया नहीं वो प्रेम क्या जाने आदि भजनों ने कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं ,को भाव विभोर कर दिया।

कथा के दूसरे दिन प्रमुख रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष नगर श्रीमती नीलम सिंह ‘राना’ , रानी आशिमा सिंह , दिल्ली हिंदू फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष डॉ. विनय प्रताप सिंह , सतीश मिश्रा, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवाकर मिश्रा , राजीव पांडेय, प्रदीप पाण्डेय , सत्य प्रकाश सिंह, संतोष मिश्रा, आलोक मिश्रा, विकास मिश्रा, संजय मिश्रा, विशाल यादव, सच्चिदानंद मिश्रा, नीतीश पाण्डेय , सोनू दुबे , सुभाष दुबे , अवधेश मिश्रा , मास्टर शिव, अश्वनी श्रीवास्तव, सतेंद्र श्रीवास्तव आरोग्य भारती के अखिल भारतीय संघटन सचिव डॉक्टर अशोक कुमार वाष्णेय , डॉक्टर संग्राम सिंह, डाक्टर दीपक सिंह, डॉक्टर वी.के. श्रीवास्तव , निरंकुश शुक्ला, डॉक्टर प्रीतम गुप्ता, पप्पू सिंह बेइली प्रधान कौशलेंद्र सिंह के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।





