
(मनीष श्रीवास्तव ‘अंकुर’)
महोबा (उ.प्र.)। स्थानीय जिला कारागार महोबा में उस वक्त एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब हत्या के आरोप में बंद एक महिला कैदी ने बेटी को जन्म दिया। आमतौर पर सख्ती और सन्नाटे के लिए पहचानी जाने वाली जेल की दीवारों के भीतर इस बार खुशियों की किलकारी गूंजी और पूरा माहौल उत्सव में बदल गया।
जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला कैदी को प्रसव पीड़ा होने पर जेल प्रशासन की निगरानी में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। जैसे ही बेटी के जन्म की सूचना जेल प्रशासन को मिली, कारागार परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। जिला अस्पताल से नवजात बच्ची को फूलों और गुब्बारों से सजी एंबुलेंस में जिला कारागार लाया गया। एंबुलेंस के आगे ढोल-तासे बजते रहे, जो आमतौर पर जेल परिसर में देखने को नहीं मिलते। यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।
जेल के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही महिला सुरक्षाकर्मियों ने बच्ची की आरती उतारी, नजर उतारी और उसे प्यार-दुलार किया। इसके बाद जेलर ने बच्ची को गोद में लेकर उसका स्वागत किया और उसे आशीर्वाद दिया। महिला बंदियों और जेल स्टाफ ने भी नवजात के लिए न्यौछावर दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस मौके पर जेल प्रशासन का कहना था कि बच्ची का जन्म एक नई शुरुआत का प्रतीक है और कारागार में बंद महिलाओं और बच्चों के अधिकारों एवं संवेदनाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। बच्ची और उसकी मां दोनों स्वस्थ हैं और उन्हें जेल नियमों के तहत सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सलाखों के पीछे जन्मी यह नन्ही किलकारी न केवल एक मां के लिए खुशी का पल बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि हालात चाहे जैसे हों, इंसानियत और संवेदनाएं हर जगह ज़िंदा रहती हैं।





