
बस्ती (उ.प्र.)। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) द्वारा चेकिंग के दौरान बच्चों को स्कूल ले जाते वक्त बस को रोककर बच्चों को लावारिस छोड़ दिया गया। बच्चों ने स्कूल तक बस से पहुंचवाने के लिए बहुत विनती की। ड्राइवर ने मालिक से बात करनी चाही तो एआरटीओ ने उसकी मोबाइल छीन ली। उन्होंने ना तो खुद बात की ना ड्राइवर को करने दी। एआरटीओ ने बच्चों की एक ना सुनी और क्रूरता का परिचय देते हुए चाहे जहां जाने को कहकर कड़ाई से भगा दिया। मामला बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र का है। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) बस्ती के अध्यक्ष प्रेरक मिश्र ने एआरटीओ प्रवर्तन से 10 अप्रैल तक स्पष्टीकरण मांगा है। प्रेरक ने कहा कि ऐसी घटनाओं का बच्चों के मन मस्तिष्क पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे नौनिहालों की प्रतिभाओं का हनन भी होता है।
जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही सीडब्ल्यूसी : प्रेरक
उक्त मामले पर चेयर पर्सन प्रेरक मिश्र ने कहा कि ऐसी घटनाएं मानवाधिकार का हनन हैं। एक तरफ सरकार बच्चों के संरक्षण और शिक्षा और भरपूर पोषण के लिए सारे इंतजाम कर रही है। नाबालिग बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए कानून लागू है। यहां तक कि नाबालिग बच्चों से कोई पूछताछ के लिए पुलिस को वर्दी में रहना मना है। ऐसी घटनाओं पर ऐसा दण्ड होना कि सबक मिले और बाल संरक्षण का अच्छा संदेश जाये। बच्चों का मनोबल तभी उठेगा जब उल्लेखनीय कार्यवाही हो। बच्चों को पता चलना चाहिए कि न्याय मिला। तभी उनके चेहरे खिलेंगे। कहीं मायूस ना हो जाये मासूमियत। प्रेरक ने कहा कि बच्चों के सम्पूर्ण संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। घटना चार अप्रैल की है। एआरटीओ प्रवर्तन का पद इस वक्त खाली है, जिसे पीटीओ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव देख रहे हैं। चेकिंग के दौरान इनके सिपाहियों ने स्कूल बस के चालक को ड्राइविंग सीट से खींच लिया और मोबाइल छीन ली और बच्चों को नीचे उतारकर भगा दिया। यह अमानवीय कृत्य है इसे सहन नही किया जा सकता।

मामला बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र के डुहवा मिश्र का है। यहां संचालित एसएनएसबी इंटर कालेज के छात्रों ने न्यायपीठ को बताया कि 4 अप्रैल को हम लोग प्रातः काल स्कूल की बस से पढ़ने जा रहे थे, हम लोगों की बस हर्रेया थाना क्षेत्र के बड़हर पेट्रोल पम्प के पास जैसे ही पहुंची वैसे ही एआरटीओ बिभाग के लोगों ने बस को रुकवा लिया और बस चालक का मोबाइल छीन लिया, और कहा की वाहन की जाँच की जानी है इसलिए बस को हम लोग थाने पर ले जायेंगे, और बस में सवार बच्चों को बस से उतर जाने को कहा। गया। जब हम लोगों ने कहा की अंकल हम लोग बिना बस के अब स्कूल कैसे जायेंगे, पहले हम लोगों को स्कूल छोड़वा दीजिये तब बस लेकर जाईये, तब विभाग के लोगो ने कहा की आप लोगों को स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी नही है। बच्चों ने बताया कि इसके बाद हम लोगों को पैदल सुनसान राह से स्कूल जाने को विवश होना पड़ा, नाबालिक बच्चों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्र, सदस्य अजय श्रीवास्तव, सदस्य डॉ. संतोष श्रीवास्तव एवं मंजू त्रिपाठी ने आपसी विमर्श के बाद इसे बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य, एवं बाल अधिनियम 2015 की मंशा के विपरीत मानते हुए एआरटीओ प्रवर्तन से स्पष्टीकरण माँगा है। अध्यक्ष प्रेरक मिश्र ने इस सम्बन्ध में कहा की बस की जाँच करना, कार्यवाही करना ठीक है, लेकिन बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद ही कोई कार्यवाही करनी चाहिए थी, इस मामले में स्पष्टीकरण माँगा गया है, स्पष्टीकरण आने के बाद आवश्यक विधिक कार्यवाही की जायेगी, बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण न्यायपीठ की प्राथमिकता है, इससे समझौता नही किया जा सकता।
एसएनएसबी इण्टर कॉलेज के प्रबंधक करूणाकर मिश्र ने कहा कि चूंकि बस का परमिट 2029 तक वैध है, इसी मुगालते में रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण पर ध्यान नहीं दे पाया। इसकी वैधता सात माह पहले खत्म हुई थी। उन्होंने कहा बस पर 22 हजार रूपये जुर्माना लगा है, इसका कोई कष्ट नहीं है। जुर्माना तो लगना ही था, उन्हें बच्चों को पहले स्कूल जाने देना चाहिए था। इससे बच्चों के कोमल मन पर जो कुप्रभाव पड़ा, बच्चे कुंठित हो सकते हैं। सिस्टम और संविधान के प्रति बच्चों के मन में अविश्वास की जन्म लेगी। इसकी भरपाई कौन करेगा। यदि इसके लिए एआरटीओ पर जुर्माना लगाया जाये, तो क्या होगा।





