बस्ती (उ.प्र.)। बस्ती में भाजपा नेता मनीष मिश्र और इंका नेता बृजेश कुमार आर्य के बीच उपजे विवाद से सियासी पारा चढ़ गया है। कोई खुद को किसी से कम समझने को तैयार नहीं है। एक दूसरे पर बयानों की बौछार और ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए मुख्य हथियार सोशल मीडिया बनाया गया है। जिसमें फेसबुक पर जमकर जुबानी जंग चल रही है। इसी प्लेटफार्म पर मनीष मिश्र ने राहुल गांधी पर प्रहार करते हुए वियतनाम से लौटने पर उनके जेल जाने की बात कही थी। उसके बाद बृजेश आर्य ने 2029 के बाद मनीष मिश्र को जेल जाने की बात कह दी। यहीं से गरमाया माहौल थाना पुलिस से लेकर एक दूसरे को देख लेने तक पहुंच गया। आज कांग्रेस नेताओं ने एसपी को दिये प्रार्थना पत्र में मनीष मिश्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। मामले में बृजेश आर्य को म्लेच्छ कहे जाने पर ज्यादा विरोध दर्ज कराया जा रहा है और इसकी अलग अलग परिभाषाएं भी गढ़ी जा रही हैं।

महादेवा विधानसभा क्षेत्र 311 से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी बृजेश कुमार आर्य के नेतृत्व में आज सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। यहां उनके खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में भाजपा नेता मनीष मिश्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी और बृजेश कुमार आर्य ने आरोप लगाया कि मनीष कुमार मिश्र ने सोशल मीडिया के माध्यम से बृजेश कुमार आर्य के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट और टिप्पणियों के जरिए उन्हें अपमानित किया गया तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी दलित समाज के प्रति विरोधी मानसिकता को दर्शाती है।

बृजेश कुमार आर्य ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 22 अक्टूबर 2026 को शाम करीब छह बजे मनीष मिश्र ने उनके खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए धमकी दी। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से उनकी जान को खतरा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। नेताओं ने मांग किया कि मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम सहित अन्य लागू गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया जाए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

इस मौके पर बृजेश आर्य के साथ गिरजेश पाल, ज्ञानेंद्र पांडेय, डॉ. दीपेन्द्र सिंह, डॉ. आलोक रंजन वर्मा, मनीष दुबे, बाबूराम सिंह, चंद्रशेखर वर्मा, वाहिद सिद्दीकी, अलिफ अख्तर, पंकज राव, महेश कुमार, शोभित चौधरी, दुर्गेश चौधरी, मोहम्मद रफीक, रामप्रीत, फजल आजम, शौकत अली नन्हू, मुकेश कुमार, शुभम कुमार, वकील विक्रम गौतम, धर्मेंद्र कनौजिया, आशुतोष पांडेय, आदित्य त्रिपाठी, कन्हैया यादव, राकेश मणि त्रिपाठी, अमित सिंह, संदीप श्रीवास्तव, संजय चौधरी, सुधीर यादव, प्रशांत पाठक, दूधनाथ पटेल, रामबहादुर सिंह, शौकत अली और आनंद निषाद सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। मामले में कल यानी 22 अक्टूबर को पहले मनीष मिश्र ने पुरानी बस्ती थाने में दरख्वास्त दी है। जिसपर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और काफी आक्रामक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रही है। इस सब से अलग मनीष मिश्र के एक बयान में सबको हैरत में डाल दिया है, जिसमें फेसबुक पर लिखा गया है कि – सोच रहा हूं बृजेश आर्य के घर जाकर चाय पी आऊं क्या। जबकि इसके पूर्व वो यह भी कह चुके हैं कि बृजेश अगर समुद्र की तलहटी में छिप जाएंगे तो भी हमसे बच नहीं पाएंगे। समाचार लिखे जाने तक किसी के ऊपर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।


