बस्ती (उ.प्र.)। जिले के लालगंज थाने में तैनात करीब तीस वर्षीय महिला सिपाही की मौत हो गई। कुछ दिन पहले बाइक से गिरने के कारण उनके सिर में चोट लग गई थी। टांके लगे होने के बावजूद उन्होंने कई दिनों तक ड्यूटी भी की। तकलीफ बढ़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मृतका केसरी वर्मा और उनके पति नागेन्द्र वर्मा दोनों लोग पुलिस महकमे में आरक्षी थे और एक ही जगह तैनात थे। नागेन्द्र वर्मा ने अपनी आरक्षी पत्नी केसरी की मौत के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए समय पर छुट्टी की स्वीकृति ना दिये जाने का आरोप लगाया है।
लालगंज थाने में तैनात 30 वर्षीय महिला आरक्षी केसरी वर्मा की मौत के बाद यह सवाल पुलिस महकमे के सामने खड़ा है। सिर में चोट, चार टांके, मेडिकल रिपोर्ट और सीटी स्कैन के बावजूद छुट्टी न मिलने का आरोप अब उनकी मौत के साथ जुड़ गया है। पति सिपाही नागेंद्र वर्मा का कहना है कि अगर समय रहते केसरी को छुट्टी मिल जाती और वह अपना इलाज करा पातीं, तो शायद आज उनकी पत्नी उनके साथ होतीं।
जिस सिर पर चार टांके लगे, उसी सिर के साथ निभाती रहीं ड्यूटी
कुछ दिन पहले प्रतापगढ़ जाते समय केसरी हादसे का शिकार हो गई थीं। सिर में चोट लगी। प्रतापगढ़ में उपचार के दौरान चार टांके लगाए गए। डॉक्टरों ने जांच की। इलाज अभी चल ही रहा था कि केसरी बस्ती लौट आईं और ड्यूटी पर पहुंच गईं।
वर्दी का फर्ज शायद दर्द से बड़ा था।
लेकिन शरीर को आराम चाहिए था। पति के मुताबिक, इसी वजह से केसरी ने छुट्टी लेने का फैसला किया।
27 अगस्त… छुट्टी की उम्मीद लेकर पहुंची थीं एसपी ऑफिस
पति नागेंद्र के अनुसार, 27 अगस्त को केसरी मेडिकल रिपोर्ट और सीटी स्कैन साथ लेकर एसपी कार्यालय पहुंची थीं। उन्हें उम्मीद थी कि चोट और इलाज के दस्तावेज देखकर छुट्टी मिल जाएगी और वह कुछ दिन आराम कर सकेंगी।
लेकिन नागेंद्र का आरोप है कि एसपी कार्यालय के दो कर्मचारियों ने छुट्टी देने से मना कर दिया। उनका कहना है कि ईएल नहीं होगा और मेडिकल लीव भी नहीं मिलेगी।
केसरी वापस लौट आईं।
शायद उन्हें भी नहीं पता था कि यह वापसी उनकी जिंदगी की आखिरी वापसी बन जाएगी।
शनिवार भोर… अचानक बिगड़ी तबीयत और खत्म हो गई जिंदगी की जंग
शनिवार सुबह करीब चार बजे अचानक केसरी की तबीयत बिगड़ गई। पति और साथी पुलिसकर्मी उन्हें लेकर अस्पताल की ओर दौड़े। कोशिश थी कि किसी तरह जिंदगी बच जाए।
लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही केसरी की सांसें थम गईं।
जिस पत्नी को कुछ दिन आराम की जरूरत थी, वह हमेशा के लिए आराम कर गई।
जिस पति ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं, उसके सामने अब पत्नी का शव था।
पोस्टमार्टम हाउस पर टूट गया नागेंद्र का सब्र
पत्नी की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर नागेंद्र वर्मा का दर्द छलक पड़ा। वह फूट-फूटकर रोते रहे। आंखों के सामने पत्नी की यादें थीं और मन में एक सवाल—क्या समय पर छुट्टी मिल जाती तो केसरी बच सकती थीं?
नागेंद्र ने लालगंज थाने के एसओ को लिखित तहरीर देकर एसपी कार्यालय के दोनों कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। मौके पर पुलिस अधिकारी पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
अब जांच बताएगी—छुट्टी न मिलने और मौत के बीच क्या था संबंध?
केसरी की मौत के बाद पुलिस विभाग की अवकाश व्यवस्था और पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि छुट्टी न मिलने और केसरी की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध था या नहीं, यह जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
लेकिन एक सवाल फिलहाल अनुत्तरित है—
जब एक घायल महिला आरक्षी इलाज के कागज लेकर छुट्टी मांगने पहुंची थी, तो उसकी फरियाद पर क्या हुआ?
केसरी चली गईं।
पीछे छोड़ गईं एक पति का रोता हुआ चेहरा और व्यवस्था से पूछा जा रहा एक सवाल—
“अगर उस दिन छुट्टी मिल जाती… तो क्या आज केसरी जिंदा होतीं?”




