
कोलकाता। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली के मणिपुर इलाके में छापामारी कर मछली पालन में इस्तेमाल होने वाले एक तालाब से बड़ी संख्या में आग्नेयास्त्र व कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई 06 जून शनिवार को गुप्त सूचना के आधार पर की गई। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार सभी लोग एक समय तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता रहे शेख शाहजहां के करीबी बताए गए हैं।

जांच में पता चला कि जिस तालाब से हथियार बरामद हुए, उसका स्वामित्व पूर्व तृणमूल क्षेत्रीय अध्यक्ष रॉबिन दास व उसके भाई गोपाल दास के पास है। छापामारी की भनक लगते ही दोनों फरार हो गए। एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी है। एसटीएफ ने सबसे पहले शाहजहां के तीन करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उनकी निशानदेही पर सरबेरिया इलाके के एक परित्यक्त मकान में छापा मारा गया, जहां से पांच आग्नेयास्त्र बरामद किए गए। इसके बाद गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर मणिपुर गांव में एक अन्य स्थान पर छापेमारी की गई। वहां एक मछली पालन वाले तालाब के अंदर छिपाकर रखे गए 13 और हथियार तथा बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए। इसी दौरान एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

बरामद हथियारों में 10 लंबी बंदूकें और आठछोटे हथियार शामिल हैं। इसके अलावा 56 जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए हैं। कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
शेख शाहजहां ने बिछाया नेटवर्क
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शाहजहां इस पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। हथियारों की खरीद कर उन्हें विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता था। मामले की गहन जांच की जा रही है। बता दें कि जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पर हुए हमले के मुख्य आरोपित शेख शाहजहां को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। वह तब से न्यायिक हिरासत में है। संदेशखाली में बड़े पैमाने पर विरोध – प्रदर्शन भी हुए थे। गांव की महिलाओं समेत स्थानीय लोगों ने शाहजहां और उसके सहयोगियों पर जमीन कब्जाने तथा महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

हालांकि, तालाब के मालिक, टीएमसी नेता और पार्टी के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष रॉबिन दास और उनके भाई गोपाल दास इलाके से फरार हो गए हैं। जांचकर्ता संदेशखाली में दास बंधुओं के घर पहुंचे। ये दोनों गिरफ्तार टीएमसी नेता शेख शाहजहां के काफी करीबी बताए जाते हैं। छापेमारी के दौरान उनके घर और आसपास के इलाके की भी तलाशी ली गई। बताया जा रहा है कि उस समय भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। माना जा रहा है कि इलाके में अशांति फैलाने के मकसद से ये हथियार जमा किए गए थे। खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे। इस ऑपरेशन के दौरान एसटीएफ के साथ केंद्रीय पुलिस बल के जवान भी मौजूद थे। हथियार बरामद होने के बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान अभी भी जारी है। इन दोनों भाइयों पर लंबे समय से स्थानीय निवासियों के साथ अत्याचार करने के आरोप लगते रहे हैं। पुलिस आरोपी टीएमसी नेता और उनके भाई की तलाश कर रही है। हथियार मिलने के बाद बीजेप ने टीएमसी पर अपना हमला तेज कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पहले तालाब से मछलियां निकलती थीं। अगर टीएमसी न होती, तो मुझे पता ही नहीं चलता कि गोलियां, बम और बंदूकें भी निकल सकती हैं। वे सचमुच दुनिया का नौवां अजूबा हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन यह साबित हो रहा है कि वे पश्चिम बंगाल राज्य को बर्बादी की कगार पर ले गए। अगर चुनाव के नतीजे अलग होते और टीएमसी जीत जाती, तो ये हथियार तालाब में नहीं होते। आम लोगों पर इन हथियारों से हमला किया जाता। मैं सरकार से अपील करूंगा कि इन तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार होने के बाद एक दिन के लिए भी जेल से बाहर न आने दिया जाए।





