
बस्ती (उ.प्र.)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बस्ती द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण निर्णय में जानडियर इंडिया से संबंधित कंपनी तथा एसपी ऑटोमोबाइल्स को बड़ी राहत मिली है। आयोग ने परिवादी द्वारा प्रस्तुत शिकायत को पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया।
प्रकरण के अनुसार, परिवादी ने आरोप लगाया था कि उसने विभिन्न किस्तों के रूप में बड़ी धनराशि जमा की, लेकिन उसे सही तरीके से ऋण खाते में समायोजित नहीं किया गया और कुछ राशि कर्मचारियों द्वारा हड़प ली गई। इसके साथ ही वाहन खरीद से संबंधित वित्तीय लेनदेन और किस्त भुगतान को लेकर भी विवाद उठाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि परिवादी ने जानडियर फाइनेंशियल के माध्यम से ऋण लेकर वाहन खरीदा था और किस्तों के भुगतान में अनियमितता रही। उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर यह भी स्पष्ट हुआ कि परिवादी द्वारा जमा की गई कुछ धनराशि को ऋण खाते में समायोजित किया गया था, जबकि शेष भुगतान समय से नहीं किया गया, जिसके चलते खाता डिफॉल्टर हो गया।

आयोग ने यह भी माना कि जिन कर्मचारियों पर धन हड़पने का आरोप लगाया गया है, उस संबंध में उपभोक्ता फोरम के बजाय संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराना था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत ऐसे मामलों का प्रत्यक्ष निस्तारण संभव नहीं है। साथ ही, एसपी ऑटोमोबाइल्स की भूमिका केवल वाहन विक्रेता तक सीमित पाई गई और ऋण लेनदेन से उनका सीधा संबंध नहीं पाया गया। इस आधार पर उनके विरुद्ध भी कोई उपभोक्ता विवाद स्थापित नहीं हुआ।
अंततः आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला कि परिवादी का वाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत पोषणीय नहीं है, इसलिए शिकायत को निरस्त किया जाता है।
इस निर्णय के साथ ही जानडियर इंडिया से जुड़ी वित्तीय संस्था और एसपी ऑटोमोबाइल्स को बड़ी जीत मिली है। आपको बता दें कि उपभोक्ता संरक्षण फोरम (अब उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत काम करने वाली एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जो ग्राहकों को घटिया वस्तुओं, खराब सेवाओं या अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ त्वरित और सस्ता न्याय दिलाती है। यह जिला (₹50 लाख तक), राज्य (₹50 लाख-₹2 करोड़), और राष्ट्रीय स्तर पर शिकायतें सुनता है।
धीरेन्द्र शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग
बस्ती (उ.प्र.)। गुरूवार को भारतीय समता मूलक महासभा प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर प्रदेश उपाध्यक्ष आर.के. सिंह पटेल और जिलाध्यक्ष विजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में महासभा पदाधिकारियों ने राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। मांग किया कि कथाकार धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में की गई अभद्र टिप्पणी के संबंध में उनके विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कराते हुये गिरफ्तार कर जेल भेजा जाय।

ज्ञापन देने के बाद महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष आर.के. सिंह पटेल ने कहा कि 25 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस द्वारा आयोजित भद्र दुर्ग शक्ति स्थल के शिलान्यास समारोह के दौरान कथाकार धीरेंद्र शास्त्री ने ‘हिंदवी स्वराज’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नीचा दिखाने का दुष्प्रयास करते हुए कहा कि जब शिवाजी महाराज युद्ध करते हुए बहुत थक गए थे तो उन्होंने समर्थ गुरु रामदास के चरणों में अपना मुकुट सौंपते हुए कहा कि अब आप अपना साम्राज्य संभालिए। धीरेन्द्र शास्त्री का यह वक्तव्य झूठा एवं काल्पनिक है। धीरेंद्र शास्त्री के इस मनगढ़ंत बयान से पूरे भारत के आम जनमानस में गहरा आक्रोश व्याप्त है। कहा कि भारतीय समता मूलक महासभा उनके इस बयान का कडे शव्दों में निन्दा करते हुये मांग करती है कि धीरेन्द्र शास्त्री के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराकर उन्हें गिरफ्तार कराया जाय।
राज्यपाल को ज्ञापन भेजने के दौरान मुख्य रूप से भारतीय समता मूलक महासभा के बद्री प्रसाद चौधरी, ई. के.सी. चौधरी, अशोक कुमार वर्मा, सुग्रीव यादव, घनश्याम चौधरी, अहमद रजा, अशोक कुमार चौधरी, कृपाशंकर चौधरी, ओम प्रकाश चौधरी, लालचंद वर्मा, राम सुरेश चौधरी, विद्या सागर, संजय चौधरी, डा. श्यामनरायन आदि शामिल रहे।





