
बस्ती (उ. प्र.)। जिले के कुदरहा विकास खण्ड के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से सटे स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर की गलत रिपोर्ट एक प्रसूता की जान का जोखिम बन गया। गनीमत रही की महिला को हायर सेंटर ले जाया गया, जिससे उसकी जान बच गई। पेट में बच्चा पहले ही मर गया था। जबकि पीएचसी के पास ही जैसे तैसे संचालित इस अल्ट्रासाउंड सेंटर ने अपनी रिपोर्ट में सब कुछ ओके बताया था, बच्चा कम से कम हफ्ता भर पहले पेट में ही मर चुका था। अब सीएमओ ने जांच की कार्रवाई शुरु की है। इसके लिए उन्होंने दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा के बगल संचालित लाइफ सिटी डाइग्नोसिस सेंटर की गलत रिपोर्ट से नवजात शिशु के मौत के मामले में सीएमओ ने दो सदस्यीय टीम को जांच कर रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिये है। बहादुरपुर ब्लाक के रामपुर गांव निवासी ओम प्रकाश यादव ने अल्ट्रासाउंड संचालक द्वारा गलत जांच रिपोर्ट देने का आरोप लगाया है। उहोंने कहा कि 16 अप्रैल की शाम को पीएचसी पर एएनएम विनोदा सिंह के पास ले गया। उहोंने अल्ट्रासांउड़ कराने की सलाह दी। जिसे लेकर लाइफ सिटी डाइग्नोसिस सेंटर पहुंचा और जांच हुआ। जिसे एएनएम को दिखाया तो मैडम बोली जांच रिपोर्ट के अनुसार सब सही है। फ़िर इंजेक्शन देकर घर भेज दी। बढते दर्द को देख कल 19 अप्रैल रविवार की शाम को फिर लाया, तो मैडम पुनः जांच के लिए फिर इसी केंद्र पर भेजा। जिसकी रिपोर्ट हमें न देकर परचे के पीछे हायर सेंटर जाने की सलाह दिया। स्थिति बिगडती देख मैडम कैली भेज दी। वहां अल्ट्रासाउंड कराने के बाद पता चला कि दस दिन पूर्व बच्चे की मौत हो चुकी है। फिर आपरेशन करके बच्चे को बाहर निकाला गया और प्रसूता की जान बच पाया। वह अब सुरक्षित है जिसका उपचार अभी चल रहा है। स्वजनों ने अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच कर कार्रवाई की मांग की था। जिसे संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी ने टीम गठित कर जांच कर रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिये है। इस संबंध में सीएमओ डा राजू निगम ने बताया कि लाइफ सिटी डाइग्नोसिस सेंटर की शिकायत मिली है। दो सदस्यी जांच टीम गठित कर रिपोर्ट मांगा है। जिसके आधार पर कार्यवाही की जायेगी।
झूठी एफआईआर और झूठे गवाहों पर कार्रवाई पर रोक
उत्तर प्रदेश के लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां यूपी पुलिस मुख्यालय ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े पहले जारी सर्कुलर को फिलहाल वापस ले लिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों पर रोक लगा दी गई है।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 मार्च 2026 को जारी किए गए उस सर्कुलर को निरस्त कर दिया है, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि झूठी एफआईआर पाए जाने पर शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ अनिवार्य रूप से कोर्ट में परिवाद दाखिल किया जाएगा। साथ ही, कार्रवाई न करने पर संबंधित विवेचक, थाना प्रभारी और पर्यवेक्षण अधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराने का प्रावधान रखा गया था। नए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘उम्मे फरवा बनाम राज्य सरकार’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगाई है। कोर्ट ने अपने 9 फरवरी के आदेश में साफ कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के पैरा 45 से 48 तक की व्यवस्था अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी। इन्हीं निर्देशों के आधार पर पहले जारी सर्कुलर को लागू किया गया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उसे वापस ले लिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिलहाल झूठी एफआईआर और गवाही को लेकर पहले जैसी सख्त प्रक्रिया लागू नहीं होगी और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद तय की जाएगी।



