
बस्ती (उ.प्र.)। मकान बेचने के नाम पर एक करोड़ 90 लाख रुपये लेने और बाद में रजिस्ट्री से इनकार करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बस्ती के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। मामले में रत्नाकर श्रीवास्तव और उनकी पत्नी वर्षा श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है। पीड़ित दिव्यांशु खरे के मुताबिक वह चित्रांश इंटरप्राइजेज फर्म के प्रोपराइटर हैं और व्यवसाय के सिलसिले में उनकी रत्नाकर श्रीवास्तव से मित्रता हुई थी। दोनों के बीच वर्ष 2021 से ऑनलाइन रुपये का लेनदेन भी होता रहा। इसी व्यावसायिक संबंध के चलते पीड़ित का आरोप है कि उसे रत्नाकर और उनकी पत्नी पर भरोसा हो गया।
आरोप है कि रत्नाकर श्रीवास्तव ने अपना दो मंजिला मकान बेचने की पेशकश की और इसकी कीमत 2.50 करोड़ रुपये तय हुई। अगस्त 2025 में बैनामा करने की बात कही गई। इस दौरान अनुभव श्रीवास्तव और सूरज श्रीवास्तव के मौजूद रहने का भी दावा किया गया है। पीड़ित के अनुसार मकान के स्वामित्व से संबंधित नगर पालिका का एसेसमेंट प्रपत्र भी दिखाया गया, जिसमें रत्नाकर श्रीवास्तव का नाम दर्ज बताया गया।
शिकायत के अनुसार, एसेसमेंट प्रपत्र पर भरोसा करते हुए पीड़ित और उसके चाचा के बैंक खातों से अलग-अलग किस्तों में 15 जुलाई 2025 तक कुल एक करोड़ 90 लाख रुपये रत्नाकर श्रीवास्तव और उनकी पत्नी के बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद मकान की रजिस्ट्री करने में टालमटोल शुरू हो गई। पीड़ित का कहना है कि संदेह होने पर नगर पालिका परिषद से दस्तावेज की तस्दीक कराई गई। इसमें कथित तौर पर मकान रत्नाकर श्रीवास्तव की मां कृष्ण मोहनी के नाम दर्ज मिला। इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से रकम वापस करने की मांग की, लेकिन रकम वापस नहीं की गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 9 नवंबर 2025 को शाम करीब छह बजे पीड़ित अपने मित्र अनुभव श्रीवास्तव और सूरज श्रीवास्तव के साथ आरोपियों के घर गया था। वहां रकम वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पीड़ित के मुताबिक उसने मामले में कोतवाली पुलिस और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 10 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री के जरिए भी शिकायत भेजी गई। कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बस्ती ने 17 अगस्त 2026 को धारा 173 (4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष कोतवाली को मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना कराने और सात दिन के भीतर न्यायालय को कार्रवाई से अवगत कराने का आदेश दिया। आदेश के अनुपालन में 18 अगस्त को इसकी प्रति कोतवाली भेजी गई। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। शिकायत में आरोपियों पर कूटरचित दस्तावेज के जरिए विश्वास कायम कर धोखाधड़ी से रकम हासिल करने और उसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। पुलिस की विवेचना में दस्तावेजों, बैंक खातों में हुए लेनदेन और मकान के वास्तविक स्वामित्व समेत अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी। इसके पूर्व लेनदेन को और भी आरोप प्रत्यारोप हो चुके हैं।





