
रिश्वत की ऑडियो पर गिरी गाज, एडीएम एलआर कीर्ति प्रकाश भारती के अर्दली के रूप में तैनात सफाईकर्मी जयसिंह निलंबित
बस्ती (उ. प्र.)। जिले में भ्रष्टाचार के आरोपों पर पंचायतराज विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए (एडीएम भू राजस्व) सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती के अर्दली के रूप में संबद्ध सफाईकर्मी जयसिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला पंचायतराज अधिकारी घनश्याम सागर ने गुरुवार देर शाम करीब आठ बजे यह कार्रवाई की। निलंबन का आधार रिश्वत लेने की स्वीकारोक्ति से जुड़ा एक ऑडियो बताया गया है, जिसे प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार मानते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जिला पंचायतराज अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जयसिंह वर्तमान में एडीएम के साथ अर्दली के रूप में कार्यरत था। उसके संबंध में रिश्वत लेने की स्वीकारोक्ति का एक ऑडियो प्राप्त हुआ है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि संबंधित कर्मचारी ने अपने शासकीय पद एवं दायित्व का दुरुपयोग करते हुए अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया है। यह कृत्य शासकीय सेवा की गरिमा के विपरीत तथा अत्यंत गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी का आचरण उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों से शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनविश्वास प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर जयसिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में जयसिंह को एडीओ पंचायत, विक्रमजोत कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सहायक जिला पंचायतराज अधिकारी रेखा मौर्या को सौंपी गई है। उन्हें नियमानुसार आरोप-पत्र तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पंचायतराज विभाग में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति ने किसी काम के लिए अर्दली के माध्यम से पचास हजार रु. की रिश्वत दी थी। काम हुआ नहीं तो वह अपने पैसे मांगने लगा और इस सम्बन्ध में अर्दली से हुई बातचीत रिकार्ड हो गई। जिसमें अर्दली ने कहा है कि आपका पैसा दे दिया है, काम नहीं हुआ तो पैसा होगा। हम बात करके बताएंगे। इसी मामले ने तूल पकड़ लिया है और अर्दली की ड्यूटी कर रहे सफाई कर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है।
सपा ने मनाई बाबा लक्खी शाह बंजारा की जयंती
बस्ती। शनिवार को समाजवादी पार्टी की मासिक बैठक पार्टी कार्यालय पर जिलाध्यक्ष एवं बस्ती सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में बूथ स्तर पर सांगठनिक मजबूती, जनहित के सवालों को लेकर संघर्ष और तेज करने के साथ ही बाबा लक्खी शाह बंजारा को उनकी जयंती पर याद किया गया।

बैठक में सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाय। उन्होने कहा कि बूथ जीते तो चुनाव जीत जायेंगे, बस्ती और प्रदेश की जनता सपा की मजबूत सरकार बनाने का मन बना चुकी है क्योंकि भाजपा सभी मोर्चा पर विफल है और मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के मंदिर से चंदा चोरी के कारण लोगों की आस्था भाजपा से भी डगमगा गयी है।

सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि बाबा लक्खी शाह बंजारा 17वीं सदी के एक महान व्यापारी, योद्धा और सिख धर्म के निष्ठावान अनुयायी थे। उनका जन्म 1580 में पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के मुजफ्फरगढ़ में हुआ था। उन्हें मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापार करने वाले सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर और दानवीर के रूप में याद किया जाता है।

पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, विधायक राजेन्द्र चौधरी, कविन्द्र चौधरी ‘अतुल’ दयाशंकर मिश्र, राजाराम यादव, निजामुद्दीन, रविन्द्र यादव, मो. सलीम, समीर चौधरी, जमील अहमद, रामचन्दर यादव, प्रवीण पाठक, गुलाब सोनकर, सौरभ मिश्रा ‘शनि’, राजेन्द्र चौरसिया, गीता भारती, राघवेन्द्र सिंह, राम सिंह यादव, प्रमोद यादव, अभिषेक यादव, जितेन्द्र यादव, विवेक यादव, अजय यादव आदि ने कहा कि 1675 में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बाद, उनके पार्थिव शरीर को चांदनी चौक से मुक्त कराने की किसी में हिम्मत नहीं थी। बाबा लक्खी शाह बंजारा ने अत्यधिक जोखिम उठाते हुए गुरु जी के धड़ को अपनी बैलगाड़ी में छिपाया और अपने घर (तत्कालीन रायसीना गांव, दिल्ली) ले आए। मुगलों को भ्रमित करने और गुरु जी का सम्मानजनक अंतिम संस्कार करने के लिए, उन्होंने अपने ही घर में आग लगा दी थी। इसी ऐतिहासिक स्थान पर वर्तमान में गुरूद्वारा रकाबगंज साहिब स्थित है। बाबा लक्खी शाह बंजारा अपने समय के सबसे धनी व्यापारियों में से एक थे। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।
मासिक बैठक और बाबा लक्खी शाह बंजारा को उनकी जयंती पर याद करने वालों में मुख्य रूप से संजय गौतम, मधुबन यादव, कैलाशनाथ शर्मा, मुरली पाण्डेय, जहीर अहमद, राजेन्द्र चौधरी, मो. उमर, अरविन्द यादव, ज्ञानचन्द चौधरी, रमाकान्त सिंह, चन्द्रिका यादव, कुलदीप मौर्य, राजदेव प्रसाद, अकबर अली, राहुल सिंह, आर.डी. निषाद, राम सहाय, हनुमान प्रसाद चौधरी, रामशंकर निराला, नितराम चौधरी, मो. हासिम, आर.डी. गोस्वामी, रमेश गौतम, अजीत यादव, लव कुमार सिंह, मंशाराम कन्नौजिया, रहमान सिद्दीकी, तूफानी यादव, मोनू यदुवंश, मो. युनुस आलम, सुरेश चन्द्र यादव, भोला यादव, घनश्याम यादव, कक्कू शुक्ला, रजवंत यादव, राहुल सोनकर, निसार अहमद, राजेन्द यादव, वीरेन्द्र यादव, जितेन्द्र यादव, राजेश यादव, विजय लक्ष्मी, प्रिया श्रीवास्तव, सावित्री सिंह, सुशीला, चन्द्रहास, देवनाथ यादव, राधा देवी, मो. सलीम, रजनीश यादव, विवेक यादव, रीतिक, मो. अहमद सज्जू के साथ ही सपा के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





