
बस्ती (उ.प्र.)। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग पत्र के बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर का आन्दोलन भले समाप्त हो गया हो, किन्तु यूजीसी का मामला छात्रों और जनता के बीच लगातार जोर पकड़ रहा है। राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा अध्यक्ष रामजी पाण्डेय निरन्तर गांव- गांव जाकर संवाद बना रहे हैं। उनकी मांग है कि केन्द्र सरकार देश के छात्रों को जातियों, वर्गो में बांटने वाला कानून वापस ले।

26 जुलाई रविवार को राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा द्वारा साऊंघाट विकास खण्ड के गंधरिया गजराज एवं छितही खुर्द गांव में जन चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल को सम्बोधित करते हुये मोर्चा अध्यक्ष रामजी पाण्डेय ने यूजीसी के नए प्रावधानों को काला कानून करार देते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था और सामान्य वर्ग के अधिकारों के खिलाफ बताया। कहा कि इस तरह के नियम समाज में दूरियां बढ़ाने का काम कर रहे हैं, जिसका पुरजोर विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार काला कानून वापस नहीं लेती। कार्यक्रम में वर्तमान समय की जातिवादी राजनीति पर तीखा प्रहार करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता के लिए जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है।
सेक्टर प्रभारी मुख्य वक्ता राम प्रताप सिंह, अमितेष प्रताप सिंह ने संगठन की मजबूती पर जोर देते हुये समाज को एकजुट करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। जन चौपाल में विनय सिंह, अवधेश मिश्र, प्रमोद सिंह, जय सिंह, विजय पाल सिंह, महेन्द्र प्रताप पाण्डेय आदि ने कहा कि युवा देश के भविष्य है। इनके साथ राजनीतिक हित लाभ के लिये खिलवाड़ न किया जाय। सरकार तत्काल प्रभाव से इसे वापस ले। जन चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल रहे।





