
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी की नींव की ईंट कहे जाने वाले आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पार्टी छोड़कर पंजाब के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। ये सबसे महत्वपूर्ण शीर्ष नेताओं की लिस्ट में थे। राघव चड्ढा ने बड़े करीने से सियासी कामयाबी का सफर अख्तियार किया है। दल बदल के नजरिये से आम आदमी पार्टी खत्म हो जायेगी। क्योंकि आप के दो तिहाई सांसद भाजपा में शामिल हो चुके होंगे और इसी टीम को आम आदमी पार्टी माना जाएगा। इसके साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को हटाकर राघव चड्ढा को यहां का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।

एक दौर था जब पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को ‘सुपर सीएम’ बताया जाता था। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी। पार्टी ने भगवंत मान को सीएम की कुर्सी पर बिठाया था लेकिन कथित तौर पर पर्दे के पीछे से सारी बागडोर राघव चड्ढा के पास ही थी लेकिन उन्हीं राघव चड्ढा ने चार साल बाद ने ऐसी बगावत की है, कि राज्यसभा में पूरी आम आदमी पार्टी ही बिखर गई है। राघव चड्ढा ने अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आम आदमी पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा कर दी। वे अपने साथियों संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने कहा, “हम राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए बीजेपी में विलय करते हैं।” ध्यान देने वाली बात यह है कि अशोक मित्तल को केजरीवाल ने 2 अप्रैल को राज्यसभा में राघव चड्ढा की जगह दी थी।
भ्रष्ट नेताओं के हाथ में आप
राघव चड्ढा ने अपने फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि आम आदमी पार्टी के अन्य राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल, पाठक और मित्तल उनके साथ भाजपा में शामिल हो गए हैं। कभी अरविंद केजरीवाल के चहेते माने जाने वाले चड्ढा ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी की गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है क्योंकि वह उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे और कहा कि आम आदमी पार्टी “भ्रष्ट नेताओं के हाथों में पड़ गई है। राघव चड्ढा को 2022 के चुनावों से पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के ऐतिहासिक उदय की कहानी लिखने में अहम भूमिका निभाने वाले रणनीतिकार के तौर पर जाना जाता है। लेकिन अब वो सियासत पूरी तरह से बदल गई है। 2022 के चुनावों से पहले राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की राज्य इकाई में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक के रूप में उभरे। हालांकि, भगवंत मान मुख्यमंत्री बने, लेकिन चड्ढा, एक युवा और कुशल रणनीतिकार होने के चलते पंजाब के राजनीतिक हलकों में पार्टी के संकटमोचक और ‘सुपर सीएम’ के तौर पर जाने जाते थे।
घर था ‘सत्ता का अड्डा’
साल 2022 के पंजाब चुनाव में राघव चड्ढा ने पार्टी के प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी संदेश और संगठनात्मक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इससे उन्हें पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल का विश्वास हासिल हुआ था। इसी साल पंजाब से राज्यसभा के लिए उनकी नियुक्ति ने राज्य में गहन प्रभाव रखने वाले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। उन्हें चंडीगढ़ के सेक्टर 2 में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के पास पंजाब सरकार का एक आलीशान बंगला दिया गया था। राघव को चड्ढा के मकान नंबर 50 को पंजाब की सियासत में ‘सत्ता का अड्डा’ भी कहा जाता था। वे पंजाब पुलिस की सुरक्षा में राज्य भर में घूमते थे, नौकरशाहों से बैठकें करते थे और यहां तक कि प्रशासनिक फेरबदल और आईएएस एवं आईपीएस अधिकारियों के तबादलों के लिए अंतिम अधिकार भी उन्हीं के पास था।
राघव के वर्चस्व पर उठते रहे सवाल
इसके चलते ही उस समय विपक्ष ने उन्हें “संवैधानिक निकाय” करार दिया था। नौकरशाहों की महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों की अध्यक्षता करने के कारण आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। 11 जुलाई 2022 को उन्हें एक अस्थायी सरकारी सलाहकार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्हें जनहित के मामलों, विशेष रूप से वित्त और जनहितैषी पहलों के कार्यान्वयन पर सलाह देने का कार्य सौंपा गया था।

उसके बाद से राघव चड्ढा की पंजाब में उनकी यात्राएं कम होती चली गईं। फरवरी 2025 में आम आदमी पार्टी की दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद राघव चड्ढा पंजाब से और ज्यादा दूर हो गए क्योंकि मार्च 2025 में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को राज्य में आम आदमी पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया गया था। मनीष सिसोदिया और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी संभालने के बाद राघव चड्ढा शासन संबंधी बैठकों में शायद ही कभी नज़र आते थे। 2025 के अंत में, चड्ढा को अपना सरकारी बंगला खाली करने के लिए कहा गया।
घटाया कद तो कर दी थी बगावत
राघव चड्ढा की पंजाब में घटती लोकप्रियता का सबसे स्पष्ट संकेत तब मिला जब आम आदमी पार्टी ने 2 अप्रैल को उन्हें राज्यसभा में अपने उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया। आधिकारिक तौर पर संगठनात्मक बदलाव के रूप में प्रस्तुत इस कदम को दरकिनार करने के रूप में देखा गया है। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि आप के दो-तिहाई से ज्यादा राज्यसभा सांसद भाजपा के साथ विलय कर रहे हैं। उन्होंने आप पर आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुकी है।

चड्ढा ने कहा, जिस पार्टी को मैंने अपना खून-पसीना देकर बनाया और 15 साल जवानी दी वह अब देश या राष्ट्रीय हित में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है। आज इस्तीफा देने वाले सात राज्यसभा सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने आज ही भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात की और औपचारिक रूप से भाजपा जॉइन कर ली। बाकी सदस्य भी जल्द भाजपा में शामिल होने वाले हैं।





