
ब्रजेश पाठक के आवास पर भाजपा कोर कमेटी की ऐतिहासिक बैठक, यूपी की सियासत में बदले समीकरणों के साथ ‘सामूहिक नेतृत्व’ का नया संकेत
सीएम आवास से बाहर पहली बार हुई उच्चस्तरीय बैठक, ‘मिशन 2027’ और संगठनात्मक बदलावों पर मंथन तेज
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार की शाम एक नई इबारत लिखी गई, जब भाजपा की सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली ‘कोर कमेटी’ की बैठक पारंपरिक परिपाटी को तोड़ते हुए मुख्यमंत्री आवास या पार्टी मुख्यालय के बजाय उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर आयोजित की गई। योगी सरकार के अब तक के कार्यकाल में यह पहला अवसर है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
शाम 6 बजे शुरू हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। इसे केवल एक औपचारिक बैठक न मानकर संगठन और सरकार के बीच बदलते शक्ति संतुलन तथा ‘सामूहिक नेतृत्व’ के उभरते संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब तक इस स्तर की सभी रणनीतिक बैठकें 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ही आयोजित होती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि जो अवसर लंबे समय से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को नहीं मिला, वह ब्रजेश पाठक को कैसे प्राप्त हुआ। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व शीर्ष नेतृत्व केशव मौर्य के आवास पर अनौपचारिक रूप से गया था, लेकिन नीतिगत निर्णयों वाली आधिकारिक कोर कमेटी की मेजबानी पहली बार किसी डिप्टी सीएम को सौंपना कई मायनों में बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है।
माना जा रहा है कि भाजपा अब सत्ता के केंद्रीकरण से आगे बढ़कर उसे विकेंद्रीकृत करने और कार्यकर्ताओं व जनता के बीच एकजुटता का संदेश देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यह रणनीति आगामी चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक मजबूती का आधार भी बन सकती है।
बैठक के एजेंडे में ‘मिशन 2027’ प्रमुख रूप से शामिल रहा। इसके तहत संगठनात्मक फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों के लिए सख्त समयसीमा तय करने पर मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने संघ नेतृत्व को आश्वस्त किया है कि 30 मार्च तक सभी जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन, 15 अप्रैल तक नई प्रदेश टीम की घोषणा और 15 मई तक निगमों, आयोगों व बोर्डों में लंबित नियुक्तियों को पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए ओबीसी आयोग के गठन और व्यापक चुनावी रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक 20 मार्च को मुख्यमंत्री आवास पर हुई लंबी ‘समन्वय बैठक’ का अगला चरण मानी जा रही है, जिसमें संघ की ओर से मंत्रियों और विधायकों की कार्यशैली पर असंतोष जताया गया था।
संघ ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि मंत्रियों का अपने ही संगठनात्मक ढांचे से तालमेल कमजोर है और विधायकों की विवादित बयानबाजी से जनता के बीच नकारात्मक संदेश जा रहा है। ऐसे में इस बैठक में इन कमियों को दूर करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी शांत करने और जातिगत विमर्श के बजाय ‘राष्ट्रवाद’ को केंद्रीय मुद्दा बनाने की रणनीति पर सहमति बनने के संकेत हैं।
बैठक में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की मौजूदगी ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले माहौल को अनुकूल बनाने और संगठनात्मक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह बैठक निर्णायक मानी जा रही है।





