
बस्ती (उ.प्र.)। मुण्डेरवा थाना क्षेत्र के सण्डा गांव निवासी अखिलेश पाण्डेय पुत्र लक्ष्मीशंकर पाण्डेय ने पुलिस अधीक्षक बस्ती को शिकायती पत्र देकर मुंडेरवा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, पुलिस द्वारा कथित मारपीट का मेडिकल परीक्षण कराने तथा भविष्य में दी जा रही कथित धमकी से सुरक्षा दिलाने की मांग की है।
शिकायती पत्र के अनुसार, अखिलेश पाण्डेय की शादी करीब नौ वर्ष पूर्व हुई थी और उनका सात वर्षीय बेटा है। पत्र में बताया गया है कि कुछ पारिवारिक विवाद के बाद उनकी पत्नी ने मुंडेरवा थाने में शिकायत की। शिकायत के बाद 112 नंबर की पुलिस उनके घर पहुंची, लेकिन उस समय अखिलेश घर पर मौजूद नहीं थे।

अखिलेश का आरोप है कि घर वापस आने के बाद 14 अगस्त 2026 को मुंडेरवा थाने के पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर थाने ले गए। आरोप है कि वहां रातभर उनके साथ मारपीट की गई और उनके पैर का नाखून तक निकाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी चिकित्सकीय जांच नहीं कराई गई और उनके विरुद्ध धारा 170, 135 और 126 बीएनएसएस के तहत चालान कर दिया गया।
शिकायती पत्र में अखिलेश ने आरोप लगाया है कि उन्होंने प्रकरण में परगनाधिकारी के समक्ष जमानत ली। उनका कहना है कि पुलिस की ओर से कथित तौर पर यह धमकी दी जा रही है कि यदि उन्होंने आगे कोई कार्रवाई की तो उनके साथ फिर मारपीट कर हाथ-पैर तोड़कर उन्हें अपाहिज बना दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि कथित मारपीट के कारण उन्हें चलने में भी परेशानी हो रही है। अखिलेश पाण्डेय ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने थाने द्वारा कथित मारपीट का मेडिकल परीक्षण कराने और भविष्य में मिल रही धमकी से सुरक्षा प्रदान करने की भी गुहार लगाई है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

पीड़ित अखिलेश पाण्डेय के भाई कोला पाण्डेय ने पुलिस की बर्बरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है इतनी भयंकर प्रताड़ना से यदि उनके भाई की मौत हो जाती तो पुलिस प्रशासन क्या करता। उन्होंने दोषी थानाध्यक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग करते हुए कहा कि लगातार ब्राह्मण समुदाय को प्रताड़ित किया जा रहा है और सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। उन्होंने कहा कि अपने भाई के साथ हुई इस निर्ममता के खिलाफ वे कानूनी लड़ाई में भी पीछे नहीं रहेंगे। थानाध्यक्ष ने घोर अन्याय और अमानवीय कृत्य किया है, इसके लिए उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए।





