
नई दिल्ली। सदन के पटल पर विशेष सत्र के तहत लाया गया महिला आरक्षण बिल 17 अप्रैल को लोकसभा में पास नहीं हो सका है। यह पहली बार है, जब सदन में पीएम मोदी की सरकार को बड़ा झटका लगा है। सरकार पहली बार किसी बिल को सदन में पास नहीं करा सकी है। इसके पीछे न तो बहुमत है, और न ही कोई राजनीतिक बंदिश। बल्कि संविधान में दिए जरूरी निर्देश हैं। सरकार का इस बिल को लाने के पीछे मकसद देश की आधी आबादी यानी महिला वर्ग को सदन में 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। महिला आरक्षण और सीट वृद्धि विधेयकों के विफल होने के बाद राजग विपक्ष के खिलाफ प्रचार अभियान चलाएगा। 18 अप्रैल शनिवार को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस पर चर्चा होगी।

लोकसभा में 17 अप्रैल शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। 21 घंटे की चर्चा के बाद इस पर वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। विधेयक के गिरने के बाद विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है तो वहीं बीजेपी ने शनिवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। अगले लोकसभा चुनाव से ही महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा समेत विधानसभाओं में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का विधेयक गिरते ही भाजपा समेत राजग ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को घेरने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

अब राजग, विपक्ष के विरुद्ध प्रचार अभियान छेड़ेगा। शनिवार को कैबिनेट की बैठक भी बुलाई गई है। इसका एजेंडा स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस बात पर सबकी नजर है कि सरकार इन विधेयकों से जुड़ा कोई फैसला लेती है या नहीं। लोकसभा में विपक्ष का सहयोग नहीं मिलने के तत्काल बाद भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर राजग नेताओं की बैठक हुई। बताते हैं कि राजग हर राज्य में यह बताने कि कोशिश करेगा कि परिसीमन में किसी राज्य को नुकसान नहीं हो रहा था। सीट बढ़ने से जनगणना के बाद एससी – एसटी की सीटें भी बढ़तीं। लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में सपा, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे पारित नहीं होने दिया। जाति जनगणना हो रही है, आने वाले समय में ओबीसी को लेकर भी सदन फैसला ले सकता है, लेकिन विपक्ष ने इसे पारित नहीं किया।

लोकसभा में तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब लगा कि मानों सहमति बन गई है। लेकिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान ने सदन का पूरा माहौल बदल दिया। दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष बताए क्या बिल पारित करने के लिए सहमत हो? इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि 11 साल के जो अनुभव रहे, अगर बीजेपी ये लिख कर दे देगी कि हम महिला पीएम बनाएंगे तब भी इनका भरोसा नहीं करेंगे। अखिलेश के इस जवाब के बाद गृह मंत्री ने कहा कि ये वोट नहीं देंगे तो महिला आरक्षण बिल गिर जाएगा। लेकिन इस देश की महिलाएं देख रही है कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है?





