
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बसंत कुंज योजना में निर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने परिसर में स्थापित महापुरुषों की भव्य प्रतिमाओं का अवलोकन किया और उन्हें नमन किया। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी है। यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का एक अनुपम प्रयास है।

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ। प्रधानमंत्री ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और भाजपा व जनसंघ गलियारे का अवलोकन किया। इस गलियारे में भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वैचारिक और राजनीतिक यात्रा को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसके पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी गैलरी का भ्रमण किया, जहां उनके जीवन, विचार और संघर्ष से जुड़े चित्रों एवं प्रतीक चिह्नों को प्रदर्शित किया गया है। लखनऊ में निर्मित भव्य राष्ट्र प्रेरणा स्थल भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी- के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का एक अनुपम प्रयास है।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में किया गया है विकसित
गौरतलब है कि वसंत कुंज स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में विकसित किया गया है। परिसर में राष्ट्रवाद के शिखर पुरुषों डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण विश्वविख्यात मूर्तिकार राम सुतार और मंटू राम आर्ट क्रिएशंस द्वारा किया गया है। प्रतिमाओं को फेसेड लाइटिंग और प्रोजेक्शन मैपिंग से आकर्षक रूप दिया गया है।

संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वॉल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी म्यूरल आर्ट के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया है।

परिसर में राष्ट्र नायकों को समर्पित एक संग्रहालय का भी निर्माण किया गया है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वॉल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी म्यूरल आर्ट के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया है। संग्रहालय के कोर्टयार्ड में राष्ट्रीय भावना की प्रतीक भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। राष्ट्र नायकों को समर्पित गैलरियां उनके जीवन, विचारधारा और संघर्षों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल में है 3,000 की क्षमता वाला एम्फीथिएटर और लगभग 2 लाख लोगों की क्षमता वाला विशाल रैली स्थल
इसके अलावा राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। साथ ही यहां 3,000 की क्षमता वाला एम्फीथिएटर और लगभग 2 लाख लोगों की क्षमता वाला विशाल रैली स्थल भी बनाया गया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति का केंद्र बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रीयता और राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार भी करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में करोड़ों भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि सरकार ने उन लोगों को प्राथमिकता दी, जो सालों तक पीछे छूटे रहे और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े थे। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले करीब 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे, जबकि आज लगभग 95 करोड़ भारतीय इस सुरक्षा कवच से जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर सुशासन के उत्सव को भी याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक केवल “गरीबी हटाओ” जैसे नारों को शासन माना गया, लेकिन अटल जी ने सुशासन को ज़मीन पर उतारकर दिखाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के करोड़ों नागरिकों को पहली बार पक्का घर, शौचालय, नल से जल, बिजली और गैस कनेक्शन मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज और सुरक्षा पहुंचती हैं, तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विज़न के साथ वास्तविक न्याय होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मेड इन इंडिया उत्पाद दुनिया भर में पहुंच रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बन रहे बड़े डिफेंस कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने जिस ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत देखी, उसका निर्माण लखनऊ में हो रहा है। इसे उन्होंने भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति का असली पैमाना विकास के आंकड़े नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के चेहरे की मुस्कान है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद दर्शन का ज़िक्र करते हुए कहा कि विकास में शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा – सबका संतुलन ज़रूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत के शुरुआती उद्योग मंत्रियों में से थे और उन्होंने देश को पहली औद्योगिक नीति दी। उन्होंने कहा कि भारत में औद्योगीकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव उसी दौर में रखी गई थी, जिसे आज नई ऊंचाई दी जा रही है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को निर्णायक दिशा दी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने “दो विधान, दो निशान और दो प्रधान” की व्यवस्था को सिरे से खारिज किया था, जो आज़ादी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में लागू थी और भारत की अखंडता के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी सरकार को अनुच्छेद 370 की दीवार गिराने का अवसर मिला और आज भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू है.





